भूगोलीय बिंदु , या शितिजीय सिन्धु.
चित या पट, शमा या व्रत.
टेर या बेर , ढेर ही ढेर या टके में सेर .
सुधा या यम, सत्य या भ्रम.
स्वप्न या यथार्थ, अर्जुन या पार्थ.
विवरण या सार, खिड़कियाँ या द्वार .
विध्वंस या निर्माण, तलवार या म्यान.
कल या तरु, कल-कल या मरू.
श्वेत श्याम क्या दो ही आयाम?
एक कौरव एक पांडव, एक स्रष्टा एक तांडव.
एक शैतान एक पैगम्बर , एक ईसा एक लुसिफ़र
एक रोशन एक वीरान ,एक आदि एक वीराम .
एक बस्ती एक उजाड़, एक सकुचा एक उघाड़.
एक पत्थर एक भगवान.
श्वेत श्याम क्या दो ही आयाम?
में मनुष्य, अनंत रंग .
खुद ही निर्माण खुद ही भंग.
कभी चीत्कार कभी म्रदंग.
न में भविष्य न में भूत,
दो आयामों के बीच एक ध्यूत ,
मेरी चोपड़ मेरे शंख.
मैं मनुष्य अनंत रंग.
नोट: फोटो बारिश की एक रात मे ट्रेन से यात्रा करते वक्त लिया गया है, जो की रेल की खिड़की की एक ग्रिल का क्लोस अप है, जिसपे पानी की बूंदे इक्कठा हो रही हैं .