Wednesday, October 2, 2013

यन्त्र चलित यन्त्र रचित

यन्त्र चलित  यन्त्र रचित 

यंत्रवत तंत्र की मनुष्य  की कामना
गणतंत्र समाज की यंत्रव्रत उपासना
यंत्रचलित यंत्रो द्वारा अन्तरो को काढना
भूखचलित  जन  द्वारा  अंतरों को पाटना।
मनुष्य
यन्त्र खिचित वृत्त में यन्त्र सा ही भागता
यांत्रिकी सूर्योदय में आंखे फाड़े जागता।
यन्त्र निर्मित भ्रांतिया
यन्त्र निर्मित सत्य है
यन्त्र निर्मित क्रांति
यन्त्र निर्मित भय है
यन्त्र निर्मित आजादी
यन्त्र निर्मित मोक्ष है
यांत्रिक अभिव्यक्तियाँ
यांत्रिक ही विचार हैं
सर्वभौम यंत्रचलित
दिवालिया टकसाल है.

Sunday, November 28, 2010

individual

मैं मेरा मैं हू,
तू मेरा तू है.
न मेरे तू से मैं हू,
न मेरे मै से तू है .
प्रथ द्रष्टया तो तू औ' मैं ,
प्रथम वाकया भी तू औ' मैं.
पर हर अगली द्वितीय पे,
मेरे मैं और तेरे तू का लोप हो रहा है.
और ऐसा ही परस्पर चलता रहा तो
एक दिन न तू रहेगा,  न मै.
हम की ओर अग्रसर 
ये मै औ' तू की चिरौरी 
 जानती नहीं की ये अपने 
अस्तित्व के लिए कितनी भयावह है.....

फिर, कसी दिन 'हम' 
समवेद ,सहचर,समाज,
 नीरसता की चौखट पे
मैं औ' तू के धीमे उच्श्वासो को टटोलते'
उनके पुनर्जन्म की बाट जोहते,
मैडीक्लेम  के कागज खंगालते'
बहुतेरी कोशिशे कर रहे होंगे  
मैं औ' तू को हम से अलग करने की....