Sunday, November 28, 2010

individual

मैं मेरा मैं हू,
तू मेरा तू है.
न मेरे तू से मैं हू,
न मेरे मै से तू है .
प्रथ द्रष्टया तो तू औ' मैं ,
प्रथम वाकया भी तू औ' मैं.
पर हर अगली द्वितीय पे,
मेरे मैं और तेरे तू का लोप हो रहा है.
और ऐसा ही परस्पर चलता रहा तो
एक दिन न तू रहेगा,  न मै.
हम की ओर अग्रसर 
ये मै औ' तू की चिरौरी 
 जानती नहीं की ये अपने 
अस्तित्व के लिए कितनी भयावह है.....

फिर, कसी दिन 'हम' 
समवेद ,सहचर,समाज,
 नीरसता की चौखट पे
मैं औ' तू के धीमे उच्श्वासो को टटोलते'
उनके पुनर्जन्म की बाट जोहते,
मैडीक्लेम  के कागज खंगालते'
बहुतेरी कोशिशे कर रहे होंगे  
मैं औ' तू को हम से अलग करने की....